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आज उत्तराखंड के नैनीताल में स्थित कैंची धाम मंदिर का 60वां स्थापना दिवस है। इस मौके पर कैंची धाम में भव्य मेला लगा है। हजारों भक्त बाबा का दर्शन करने पहुंचे हैं। आइए, इस अवसर पर जानते हैं कौन हैं नीम करोली बाबा।
उत्तराखंड के नैनीताल में स्थित नीम करोली बाबा का प्रसिद्ध कैंची धाम मंदिर आज सजा हुआ है। आज 15 जून को कैंची धाम का 60वां स्थापना दिवस है। इस दिन को बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है। देश और दुनिया के कोने-कोने से लोग बाबा का दर्शन करने पहुंचे हैं। सुबह से ही मंदिर के बाहर हजारों श्रद्धालु मौजूद हैं। आज के दिन मंदिर में भंडारा भी होता है। नीम करोली बाबा की ख्याति देश-विदेश में फैली है। नैनीताल के भवाली के पास कैंची धाम आश्रम की स्थापना हनुमान भक्त नीम करोली बाबा ने की थी। नीम करोली बाबा के अनुयाई दुनिया भर में हैं।
मार्क जुकरबर्ग और स्टीव जॉब्स भी हैं बाबा के भक्त
बाबा की ख्याति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग भी बाबा में आस्था रखते हैं और उनके दरबार पर माथा टेकने आते हैं। आइए आज नीम करोली बाबा के कैंची धाम मंदिर के 60वें स्थापना दिवस पर नीम करोली बाबा के बारे में विस्तार से जानते हैं। 15 जून के दिन मालपुए का भंडारा किया जाता है। इस बार कैंची धाम मेले में लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने भवाली से कैंची धाम तक शटल सेवा शुरू की है। हाईवे का रूट भी डायवर्ट किया गया है और जगह-जगह नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं।
कौन हैं नीम करोली बाबा?
नीम करोली बाबा 20वीं सदी के महान संतों में से एक हैं। उन्हें कलयुग में हनुमान जी का अवतार माना जाता है। बाबा नीम करोली का जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में करीब 1900 में हुआ था। नीम करोली बाबा बजरंगबली के बड़े भक्त थे। उनका असली नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था। वह एक धनी ब्राह्मण परिवार से थे। मान्यताओं के अनुसार, नीम करोली बाबा को कलयुग में हनुमान जी का अवतार माना गया है। उन्हें कई नामों से जाना जाता है जैसे लक्ष्मण दास, नीम करोली बाबा, तिकोनिया वाले बाबा, और तलईया बाबा। जानकारी के अनुसार, नीम करोली बाबा के माता-पिता ने उनकी शादी 11 साल की उम्र में कर दी थी, लेकिन साधु बनने की इच्छा से उन्होंने घर छोड़ दिया था। नीम करोली बाबा के पिता उनके इस फैसले के खिलाफ थे। इसके बाद उन्होंने भक्ति में डूबकर भी अपना गृहस्थ जीवन जीना शुरू किया।
कैंची धाम मेला प्रतिवर्ष 15 जून को कैंची धाम में आयोजित होता है, जो नैनीताल के पास स्थित नीम करोली बाबा का आश्रम है। हजारों भक्त नीम करोली बाबा के दर्शन करने और उनकी कृपा पाने के लिए यहां इकट्ठा होते हैं। नीम करोली बाबा को हनुमानजी का अवतार माना जाता है और यह स्थान आस्था का केंद्र है, जहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है।
नीम करोली बाबा कौन हैं?
- नीम करोली बाबा को हनुमान जी का अवतार माना जाता है।
- उनका असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था।
- उन्होंने उत्तराखंड में ही कैंची धाम आश्रम की स्थापना की थी और यहीं साधना की थी।
- बाबा ने 11 सितंबर 1973 को अपने प्राण त्यागे थे।
कैंची धाम की सुंदरता और विशेषता
- यह स्थान दो पहाड़ियों के बीच स्थित है जो एक कैंची के आकार का निर्माण करती हैं, इसलिए इसे कैंची धाम कहा जाता है।
- यह स्थान बहुत ही पवित्र और शांत माना जाता है।
- मान्यता है कि यहां आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता और उनकी हर मनोकामना पूरी होती है।
कैंची धाम मेला
- मेला हर साल 15 जून को कैंची धाम में आयोजित किया जाता है।
- यह दिन मंदिर के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- मेले में देश-विदेश से हजारों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
- इस दिन मालपुए का प्रसाद बांटा जाता है, क्योंकि माना जाता है कि नीम करोली बाबा को मालपुए बहुत पसंद थे।
कैसे पहुंचें कैंची धाम
- सड़क मार्ग: नैनीताल से कैंची धाम लगभग 19-20 किलोमीटर दूर है, जहाँ से लोकल टैक्सी या बस से पहुंचा जा सकता है।
- रेल मार्ग: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है।
- हवाई मार्ग: सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पंतनगर एयरपोर्ट है।
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम का स्थापना दिवस 15 जून को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस मौके पर उत्तराखंड समेत पूरे देश भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा नीम करोली के दर्शन को पहुंचेंगे। आज से ही भीड़ पहुंचनी शुरू हाे गई है। दरअसल, बाबा नीम करोली एक महान संत थे। इनके भक्त इन्हें हनुमान जी का अवतार मानते हैं।
आपको बता दें कि बाबा के विचार आज भी प्रेरणादायक बने हुए हैं। नीम करोली बाबा का नाम लेने से मन शांत होता है। नैनीताल में स्थित कैंची धाम आश्रम लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। यही वो जगह है जहां बाबा नीम करोली ने साधना की थी। आज भी ये स्थान बहुत ही पवित्र और शांत माना जाता है। हर साल यहां लाखों भक्त दर्शन करने आते हैं। ऐसे में अगर आप स्थापना दिवस पर कैंची धाम जाने की सोच रहे हैं तो ये लेख आपके लिए ही है।
आज हम आपकाे अपने इस लेख में बताएंगे कि आप कैंची धाम कैसे पहुंच सकते हैं। इसके अलावा ये भी जानकारी देंगे कि आप यहां किन-किन जगहों पर घूम सकते हैं। तो आइए जानते हैं विस्तार से –
कैसे पहुंचे कैंची धाम?
नैनीताल से कैंची धाम की दूरी लगभग 19 किलाेमीटर है। आप यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। यहां जाने के कई ऑप्शन हैं। आप यहां अपनी पर्सनल व्हीकल से भी पहुंच सकते हैं। इसके अलावा ट्रेन और फ्लाइट से भी जाया जा सकता है। सबसे पास का रेलवे स्टेशन काठगोदाम है। आप यहां पहुंचकर टैक्सी या प्राइवेट बस से कैंची धाम आश्रम की ओर रवाना हो सकते हैं। इसके अलावा सबसे नजदीकी एयरपोर्ट देहरादून है, जिसे जॉली ग्रांट हवाई अड्डे के नाम से जाना जाता है, आप यहां पहुंचकर भी टैक्सी से जा सकते हैं।
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जुटेगी लाखों की भीड़
अगर आप दिल्ली में रहते हैं तो यहां से नैनीताल की दूरी लगभग 324 किलोमीटर है। सफर तय करने में करीब साढ़े 6 घंटे का समय लग सकता है। आप कश्मीरी गेट से बस पकड़कर भी जा सकते हैं। ध्यान रहे कि स्थापना दिवस के कारण यहां लाखों की भीड़ जुटने की संभावना है। ऐसे में आपको भयंकर जाम से जूझना पड़ सकता है।
नीम करोली बाबा के दर्शन के बाद कहां घूमें
- आप नैनीताल भी जा सकते हैं। इसकी दूरी 19 किलोमीटर के आसपास है। ये बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है। साथ ही यहां गर्मियों में आपको सुकून का एहसास होगा।
- कैंची धाम से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर बसा रानीखेत अपने शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां आप पहाड़ों के सुंदर नजारों को करीब से देख सकते हैं।
- अल्मोड़ा जिले में मौजूद ढोकाने वॉटर फॉल का नजारा देखने लायक होता है। आप यहां जाकर प्रकृति को करीब से देख सकते हैं।
- मुक्तेश्वर भी एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। कैंची धाम से मुक्तेश्वर की दूरी 50 किलोमीटर की दूरी पर है। ऐसे में आपकी ये ट्रिप यादगार हो सकती है।
